आसानी से समझें क्या है निजता का मौलिक अधिकार और आप पे क्या होगा इसका असर ?
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है । आधार मामले की अब 5 जजों की बेंच के सामने सुनवाई होगी ।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है । आधार मामले की अब 5 जजों की बेंच के सामने सुनवाई होगी ।
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार को राइट टू प्रायवेसी यानी निजता के अधिकार के मामले में अपना फैसला सुनाया । सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे भारत के नागरिकों का मूलभूत अधिकार बताया है । इस फैसले के बाद देश के किसी भी नागरिक की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। यानि हर किसी को अपनी निजी जानकारी गोपनीय रखने का हक है।बता दें कि राइट टू प्रायवेसी को संविधान के तहत मूल अधिकार मानना चाहिए या नहीं, इस पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद 2 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था ।
निजता के मौलिक अधिकार यानी फंडामेंटल अधिकार के मुताबिक, अब आपकी निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर सरकार कल कहे कि आप कुछ खरीदें या ट्रेन से ट्रेवल करें तो उसके लिए भी आधार देना होगा तो इसे राइट टू प्राइवेसी के मौलिक अधिकार का हनन माना जाएगा। लेकिन यहाँ यह बात भी गौर करने लायक है की निजता की दलील देकर आप बैंक एकाउंट खोलने के लिए अपनी फोटो या दूसरी निजी जानकारी देने से मना नहीं कर सकते है ।
क्या है मौलिक अधिकार ?
संविधान के अनुच्छेद 21 में नागरिक के मौलिक अधिकार का जिक्र है । मौलिक अधिकार संविधान से हर नागरिक को मिले बुनियादी मानव अधिकार हैं जिनमें राज्य द्वारा हस्तक्षेप नही किया जा सकता। इन अधिकारों का हनन होने पर कोई भी व्यक्ति हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है ।हमारे संविधान ने मौलिक अधिकारों की सीमाएं भी तय की है ।समानता का अधिकार,स्वतंत्रता का अधिकार,शोषण के विरुध अधिकार,धार्मिक स्वतंत्रता क अधिकार,सांस्कृतिक तथा शिक्षा सम्बंधित अधिकार और संवैधानिक उपचारों का अधिकार भारतीय के नागरिकों को प्राप्त छ्ह मौलिक अधिकार है ।
सरकार को झटका
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार के लिए यह एक तरह से झटका है क्योंकि सरकार ने इससे पहले कोर्ट में ये दलील दी थी कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है । केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि आज का दौर डिजिटल है, अगर निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार मान लिया जाएगा तो सरकार के योजनओं को कर्यान्वित करना आसन नहीं होगा ।
आधार पर क्या होगा असर?
निजता को लेकर बहस की शुरुआत आधार योजना की वजह से ही हुई थी। आधार को केंद्र सरकार ने पैन कार्ड बनवाने, आयकर रिटर्न भरने समेत कई सुविधाओं और योजनाओं के लिए जरूरी कर दिया था, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गईं। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है । आधार मामले की अब 5 जजों की बेंच के सामने सुनवाई होगी और कोर्ट यह देखेगा कि निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने के फैसले के बाद आधार के लिए लिया जाने वाला डाटा निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है या नहीं।
संविधान पीठ में 9 जज क्यों?
1954 में एमपी शर्मा मामले में छह जजों की पीठ ने और 1962 में खड़ग सिंह केस में आठ जजों की पीठ ने कहा था कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है । चुकीं आठ जजों की बेंच ने 1962 में अपना फैसला सुना चुकी है इसलिए 9 जजों की बेंच ही इस मसले पे पुनर्विचार कर सकती है ।



